सूरजकुंड मेले की थीम बेशक महिला सशक्तिरण न हो मगर मेले में यह हर जगह नजर आता है। कला और संस्कृति के इस महाकुंभ में देशी-विदेशी महिला कलाकारों की अनूठी भागीदारी है। महिला सशक्तिकरण के वट की जड़ें और इसकी नवीन फूटती शाखाओं को हम यहा मेले में लगे विभिन्न देशों के स्टालों का प्रबंधन कर रही महिलाओं के साथ देख सकते है। इसके साथ ही मेले में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी महिला समूह की धूम है।
भारत सहित श्रीलंका, थाईलैंड, अफगानिस्तान के स्टालों को महिला उद्यमी ही संचालित कर रही है, साथ ही उज्बेकिस्तान, भूटान के स्टालों पर बिकने वाला खूबसूरत सामान महिला हस्तशिल्पियों की कल्पना, सौंदर्य बोध, विनम्रता और निपुणता के साथ ही मानवीय संवेदनाओं को सूक्ष्मता से जानने की उनकी प्रतिभा को उजागर करता है।
स्टाल नंबर 789 में उड़ीसा की संध्या रानी साहू व्यर्थ सामान से नायाब कलाकृतियां बना रही हैं। संध्या और उसका परिवार तो उड़ीसा के आसपास के गांवों में भी लोगों को व्यर्थ सामान से कलाकृतियां बनाने का प्रशिक्षण देता है। दिल्ली मोलड़बंद स्थित साबूमिल हंसनयन आर्ट एंड थियेटर की कोरियोग्राफर राधा के प्रयास ने तो अलग ही पहचान बनाई है। राधा स्ट्रीट चिल्ड्रन को एकत्र कर उनकी कला को मेले में प्रदर्शित कर रही हैं। मेले में जब स्ट्रीट चिल्ड्रन के नृत्य और करतबों को देख दर्शक सराहते हैं तो राधा के प्रयास सार्थक नजर आते हैं।
देशी ही नहीं विदेशी महिला कलाकारों की भी इस मेले में धूम है। थाईलैंड में चावल की खेती के बाद महिलाओं द्वारा निर्मित ब्रैसलेट, हेयरबैंड की बिक्री सुश्री पैचसरी कर रही हैं। वे बड़ी ही गर्मजोशी से ग्राहकों का स्वागत करती है।
श्रीलंका के स्टाल में महिला शिल्पी कृष्णा रूपवती ने बताया कि उनके स्टाल पर सजा हुआ समान श्रीलंका के गावों में महिलाओं की सहकारिता की टीमों द्वारा बनाया जाता है जो चावल की खेती के बाद के समय में अपना समय हथकरघों और चित्रकारी में लगाती है।
उज्बेकिस्तान के स्टाल नंबर 16 पर रूसी और इस्लामी मिश्रित नाम वाले असलान बखरुद्दीन कालीन,मखमली जूतियां और सुंदर बैग बेच रहे हैं। वे बताते हैं कि यह सामान उज्बेकिस्तान के गावों में महिलाओं द्वारा ही बनाया जाता है।
स्टाल नंबर 17 हिमालय के मखमली में आचल में लहलाहते सुंदर देश भूटान का है,जहा युवा हस्तशिल्पिी निमा सागे अपने एक किशोर से दिखने वाले साथी के सहयोग से सिल्क की बुनाई वाले पर्स, वाईन बोतल कवर, वूलेन लेडी पर्स आदि बेच रही हैं।
धीरे धीरे महिला सशक्तिकरण की ताकत के साथ पटरी पर लौटता हुए अफगानिस्तान का स्टाल भी अछूता नहीं है। पिछले तीन वर्षो से आ रही आयशा सादिकी और उनकी युवा सहयोगियों को जिन्स में देखना सुखद लग रहा था जो 5000 से लेकर 2800 रुपये तक के महिला सूट, पाच सौ रुपये में बच्चों का पठानी सूट, कोट के साथ टोपी को तीन सौ रूपये में बेच रही है
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